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5 महीने की सर्चिंग के बाद भी भोपाल के मदरसों की गिनती नही कर पाई पुलिस और स्कूल शिक्षा विभाग |

भोपाल :( नुजहत सुल्तान ) भोपाल में जून के महीने मे दो ऐसे मदरसे सामने आए थे, जिनमें बिहार के कई जिलों से बच्चों को लाकर मदरसों में दाखिला कराया गया था

भोपाल के ऐसे कुछ मदरसों की जांच की गई तो, उनमें जिन बच्चो ने एडमिशन लिया था वह बच्चे स्कूल मे भी पढ़ रहे थे। विदिशा मे 35 बच्चों के स्कूल से निकलकर मदरसे मे प्रवेश लेने का मामला देखा गया | मध्यप्रदेश बाल संरक्षण आयोग की पहल पर पुलिस ने इनकी जांच की तो कुछ अवैध मदरसे मिले जो बंद भी हो गए आयोग के पूर्व सदस्य ब्रजेश चौहान ने बताया कि उन्होने पुलिस से मदरसो की जांच व गिनती करने को कहा था लेकिन पुलिस ने यह कहकर कि वह सीधे तौर पर जांच नही कर सकते | स्कूल शिक्षा विभाग के पास प्रदेश मे 2286 और भोपाल के 423 मदरसे रजिस्टेड हैं इनकी देखभाल ब्लॉक रिसोर्स को आर्डिनेटर के ज़िम्मे हैं | इस मामले में जब एडी-सीपी से बात हुई तो उन्होने बताया कि मदरसों की गिनती नही की लेकिन समय समय पर सर्चिंग होती रहती हैं | भोपाल के कुछ मदरसों के बच्चे स्कूल मे भी दाखिला ले रहे हैं दरअसल मदरसों में सिर्फ दीनी तालीम दी जाती हैं जिससे बच्चो को सिर्फ उर्दू  भाषा के वि-वि में ही प्रवेश मिल पाता हैं मध्यप्रदेश में संचालित सभी वि-वि प्रवेश के लिए छात्रों  से 10वीं 12वीं पास की मार्कशीट मांगते हैं यदि दीनी तालीम के बाद छात्रों को किसी कॉलेज या यूनिवर्सिटी में प्रवेश लेना हैं तो इसके लिए एसोसिएशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटी से पर्मिशन लेनी होती हैं | मदरसों मे पढ़ने वाले बच्चों को अब सरकारी स्कूल मे प्रवेश मिल पाता हैं क्यूंकी आरटीई के तहत 8वीं तक फेल नही किया जाता हैं यह छात्र 10वीं 12वीं की परीक्षा ओपन बोर्ड से पास करते हैं शहर के कुछ इलाकों के मदरसे के बच्चे सरकारी स्कूल मे पढ़ने आते हैं लेकिन ऐसे बच्चों का पंजीयन सिर्फ स्कूलों मे ही मान्य होगा |

 

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सैफु द्घीन सैफी डॉ मीनू पाण्ड्य
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